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पूर्वी सिंहभूम

शिक्षा समीक्षा बैठक, छात्रवृत्ति व साइकिल वितरण पर जोर

जमशेदपुर में उपायुक्त अनन्य मित्तल की अध्यक्षता में शिक्षा समीक्षा बैठक, छात्रवृत्ति भुगतान, साइकिल वितरण व शिक्षकों की उपस्थिति पर सख्त निर्देश।

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जमशेदपुर: समाहरणालय सभागार में जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री अनन्य मित्तल के निर्देशानुसार शिक्षा एवं कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना निदेशक आईटीडीए एवं उप विकास आयुक्त श्री अनिकेत सचान ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को छात्रवृत्ति भुगतान और साइकिल वितरण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।

छात्रवृत्ति भुगतान में आ रही समस्याओं का समाधान करें

बैठक में बताया गया कि कई छात्रों की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति राशि बैंक खाता त्रुटियों या एनपीसीआई मैपिंग की समस्या के कारण रुकी हुई है। उप विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि बैंक शाखाओं से समन्वय स्थापित कर जल्द से जल्द छात्रों की समस्याओं का समाधान किया जाए। इसके अलावा, आधार निष्क्रिय होने की स्थिति में बायोमेट्रिक अपडेट कराकर एनपीसीआई मैपिंग सुनिश्चित करने को कहा गया।

साइकिल वितरण में तेजी लाने का निर्देश

परियोजना निदेशक आईटीडीए ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि साइकिल वितरण कार्य में तेजी लाई जाए और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में जल्द से जल्द साइकिलें वितरित की जाएं। साथ ही, जिन प्रखंडों में अतिरिक्त साइकिल फिटर उपलब्ध हैं, उन्हें अन्य प्रखंडों में भेजकर वितरण कार्य को गति देने को कहा गया।

शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सख्ती

बैठक में ई-विद्यावाहिनी पोर्टल के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति की समीक्षा की गई। इसमें 89 शिक्षक ऐसे पाए गए, जिन्होंने अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं की थी। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि ऐसे शिक्षकों का वेतन रोक दिया जाए।

अन्य महत्वपूर्ण निर्देश:

  • विद्यालय ग्रांट राशि का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
  • पोषाक वितरण में 100% लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश।
  • सीएम स्पेशल स्कॉलरशिप योजना के तहत 7366 बच्चों को डीबीटी के माध्यम से राशि हस्तांतरित करने की योजना। अब तक 78% बच्चों को लाभ मिल चुका है, बाकी को जल्द योजना से आच्छादित करने का निर्देश।
  • विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं (पेयजल, बिजली, शौचालय) दुरुस्त करने और स्कूल परिसरों में साफ-सफाई व पौधारोपण की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर।

बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री मनोज कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री आशीष पांडेय, बीईईओ, बीपीओ, एपीएम (झारखंड शिक्षा परियोजना), बीआरपी, जेई सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

पूर्वी सिंहभूम

पूर्वी सिंहभूम में जिला परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित

पूर्वी सिंहभूम समाहरणालय में जिला परामर्शदात्री समिति एवं जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित, वित्तीय प्रगति, कृषि ऋण, व PMFME महोत्सव पर चर्चा।

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जमशेदपुर: जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री अनन्य मित्तल के निर्देशानुसार समाहरणालय सभागार, जमशेदपुर में बैंकों की जिला परामर्शदात्री समिति (DCC) एवं जिला स्तरीय समीक्षा बैठक (DLRC) आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता परियोजना निदेशक आईटीडीए श्री दीपांकर चौधरी ने की, जिसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 की तृतीय तिमाही का वित्तीय लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया।

बैठक में बताया गया कि वार्षिक जमा ऋण अनुपात में सुधार हुआ है, जिसमें बैंकों ने तृतीय तिमाही में 57.96% की उपलब्धि हासिल की, जबकि धन उपयोग स्थान के अनुसार जिले का वार्षिक जमा ऋण अनुपात 73.66% रहा, जो कि पूरे झारखंड में सर्वोच्च है। परियोजना निदेशक ने इस उपलब्धि को और बेहतर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष जोर
बैठक में प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत कुल 8,87,368 खातों की समीक्षा की गई, जिसमें 63,389 खाते शून्य राशि के पाए गए और आधार सीडिंग प्रतिशत 89.38% रहा। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बैंकों की सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इसके अलावा, PMEGP एवं PMFME योजनाओं के तहत स्वीकृत आवेदनों का शीघ्र ऋण संवितरण सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। बैठक में PMFME महोत्सव का आयोजन 23 मार्च 2025 को गोपाल मैदान में किए जाने की घोषणा की गई, जिसमें झारखंड के माननीय उद्योग मंत्री शिरकत करेंगे।

किसानों और लघु उद्योगों के लिए नई पहल
बैठक में प्राथमिकता क्षेत्र के तहत कृषि ऋण में वृद्धि, मुद्रा योजना के तहत ऋण वितरण, और केसीसी ऋण धारकों को अधिकतम लाभ पहुंचाने पर चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि केवाईसी या बैंक खाता में सुधार के लिए ग्राहकों को बार-बार बैंक शाखा न आना पड़े।

परियोजना निदेशक आईटीडीए ने नाबार्ड, जिला उद्योग केंद्र, कृषि एवं संबद्ध विभाग, सहकारिता विभाग और जेएसएलपीएस के साथ एक संयुक्त बैठक आयोजित करने की सलाह दी, जिससे जिले में लघु उद्योगों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा सके।

बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक श्री संतोष कुमार सहित विभिन्न बैंकों के जिला समन्वयक और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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पूर्वी सिंहभूम

टाटा लीज, खेल एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यालय का निरीक्षण

जिला दंडाधिकारी अनन्य मित्तल ने टाटा लीज, खेल एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यालय का निरीक्षण कर संचिकाओं की जांच की व सुधार हेतु आवश्यक निर्देश दिए।

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टाटा लीज, खेल एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यालय का निरीक्षण, प्रशासनिक कार्यों में सुधार हेतु दिशा-निर्देश जारी

जमशेदपुर: जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त अनन्य मित्तल ने टाटा लीज, खेल एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यालय का निरीक्षण किया और कार्यालय संचालन की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालय में प्रतिनियुक्त मानव बल की उपलब्धता, दैनिक उपस्थिति पंजी, महत्वपूर्ण संचिकाओं और रिकॉर्ड संधारण की स्थिति की जांच की।

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि कार्यालय की कार्य संस्कृति में सुधार लाया जाए, सभी कार्यों का समय पर निष्पादन हो और दस्तावेज अद्यतन रखे जाएं। उन्होंने अनिवार्य रूप से बायोमीट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान आगत-निर्गत पंजी, रोकड़ पंजी, स्टॉक रजिस्टर, इंडेक्स रजिस्टर आदि की जांच की गई और आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए।

उपायुक्त ने सरकारी राशि के सही उपयोग और योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि वित्त विभाग और सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस का अक्षरशः पालन किया जाए। कार्यालय परिसर की स्वच्छता बनाए रखने और कार्यावधि का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।

इस निरीक्षण के दौरान परियोजना निदेशक आईटीडीए दीपांकर चौधरी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर अनिकेत सचान, एडीसी भगीरथ प्रसाद, निदेशक एनईपी संतोष गर्ग, कार्यपालक दंडाधिकारी चंद्रजीत सिंह, मृत्युंजय कुमार, एडीएसएस नेहा संजना खलखो, जिला खेल पदाधिकारी अविनेश त्रिपाठी समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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जमशेदपुर औद्योगिक नगर विवाद पर झारखंड विधानसभा में सियासी घमासान

झारखंड विधानसभा में जमशेदपुर को औद्योगिक नगर घोषित करने के फैसले पर विपक्ष ने इसे असंवैधानिक बताया। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए अपने फैसले का बचाव किया।

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रांची: झारखंड सरकार द्वारा जमशेदपुर को औद्योगिक नगर घोषित करने के फैसले पर राज्य विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने इस फैसले को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार देते हुए सरकार पर संविधान के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया।

विपक्ष का आरोप: ‘संविधान के खिलाफ फैसला’

विपक्ष के वरिष्ठ विधायक सरयू राय ने सरकार के फैसले को झारखंड नगरपालिका अधिनियम के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस कानून के तहत औद्योगिक नगर का नेतृत्व उपायुक्त को करना चाहिए, लेकिन सरकार ने इसके लिए प्रभारी मंत्री को नियुक्त कर दिया है, जो नियमों के खिलाफ है।

सरयू राय ने यह भी कहा कि प्रस्तावित जमशेदपुर औद्योगिक नगर समिति में स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों को उचित स्थान नहीं दिया गया है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत स्थानीय स्वशासन के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया।

“सरकार का ये कदम लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है। इस तरह का फैसला संविधान के अनुरूप होना चाहिए,” राय ने कहा।

सरकार का बचाव: ‘सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन’

वहीं, शहरी विकास मंत्री सुदीव्य कुमार ने सरकार के फैसले को जायज़ ठहराते हुए कहा कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुरूप लिया गया है, जिसके तहत कानून संबंधी विवाद की स्थिति में अंग्रेजी पाठ को प्राथमिकता दी जाती है।

मंत्री ने यह भी दावा किया कि 2014 में टाटा स्टील और झारखंड सरकार के बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुए समझौते के आधार पर ही जमशेदपुर को औद्योगिक नगर घोषित करने का रास्ता साफ हुआ था।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित 27 सदस्यीय समिति में पर्याप्त जनप्रतिनिधित्व है, जिसमें छह सरकारी अधिकारी, 11 टाटा स्टील के सदस्य और जमशेदपुर के सांसद और विधायक शामिल हैं।

“यह समिति सरकार और उद्योग के बीच संतुलन बनाए रखने का काम करेगी,” मंत्री ने कहा।

विवाद जारी

हालांकि, विपक्ष सरकार की दलीलों से सहमत नहीं हुआ। सरयू राय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सिर्फ एक ‘समझौता’ करार देते हुए कहा कि यह संविधान के तहत निर्धारित प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता।

विपक्ष ने सरकार से इस अधिसूचना को रद्द करने और नये सिरे से नियमों के अनुसार समिति के गठन की मांग की है।

झारखंड विधानसभा में यह मुद्दा राजनीतिक तनाव का कारण बना हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में इस पर और विवाद गहराने की आशंका है।

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बाहा पर्व पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की पूजा-अर्चना, राज्य की समृद्धि की कामना

बाहा पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं विधायक कल्पना सोरेन ने जमशेदपुर के शास्त्रीनगर स्थित सरना पूजा स्थल में पूजा-अर्चना कर राज्यवासियों की सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

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जमशेदपुर: प्रकृति उपासना के महापर्व ‘बाहा पर्व’ के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं विधायक कल्पना सोरेन ने आज जमशेदपुर के कदमा स्थित शास्त्रीनगर के सरना पूजा स्थल ‘जाहेरथान’ में पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर राज्यवासियों की सुख, समृद्धि, उन्नति और कल्याण की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बाहा पर्व’प्रकृति के प्रति आस्था और सम्मान का पर्व है, जो हमें अपने मूल सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से जोड़ता है। उन्होंने राज्यवासियों से इस पर्व को सामाजिक समरसता और सद्भाव के प्रतीक के रूप में मनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जनजातीय समाज के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति उनका प्रेम और सम्मान पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

बाहा पर्व का महत्व
‘बाहा पर्व’ आदिवासी समाज का एक प्रमुख त्योहार है, जिसमें लोग प्रकृति की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस पर्व में फूलों और पत्तियों का विशेष महत्व होता है, जो प्रकृति की पवित्रता और सुंदरता का प्रतीक माने जाते हैं।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस मौके पर मंत्री श्री रामदास सोरेन, सांसद श्रीमती जोबा मांझी, विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, विधायक श्री मंगल कालिंदी, विधायक श्री संजीव सरदार, विधायक श्रीमती सविता महतो, पूर्व मंत्री श्री बन्ना गुप्ता के अलावा आदिवासी संथाल जाहेरथान समिति के संरक्षक श्री लक्ष्मण टुडू, अध्यक्ष श्री भुवा हांसदा, कार्यकारी अध्यक्ष श्री विक्रम कासके, महासचिव श्री पंचू हांसदा, महासचिव भीम सहित अन्य समिति सदस्य और माझी बाबा श्री बिन्दे सोरेन एवं श्री सुरेंद्र टुडू उपस्थित थे। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित थे।

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जमशेदपुर में ‘विज्ञान रथ’ का भव्य स्वागत, छात्रों में उत्साह

सीएसआईआर-एनएमएल जमशेदपुर में ‘विज्ञान रथ’ का दौरा हुआ, जिससे छात्रों में विज्ञान और नवाचार के प्रति उत्साह बढ़ा। यह पहल वैज्ञानिक जागरूकता और ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टिकोण को सशक्त करेगी।

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जमशेदपुर: सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर में ‘वन वीक, वन थीम’ विज्ञान रथ का दौरा किया गया। यह विज्ञान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की एक अनूठी पहल है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान का प्रसार करना और नागरिकों को भारत के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।

सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर सचिव, डॉ. (श्रीमती) एन. कलैसेल्वी ने 14 फरवरी को भुवनेश्वर स्थित सीएसआईआर-आईएमएमटी से इस विज्ञान रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह रथ ओडिशा, झारखंड और पड़ोसी राज्यों के स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों तक पहुंचेगा और तीन सप्ताह तक विज्ञान व अनुसंधान को लोकप्रिय बनाने का कार्य करेगा।

सीएसआईआर-एनएमएल जमशेदपुर में विज्ञान रथ के स्वागत के दौरान, संस्थान के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने इस पहल को विज्ञान संचार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। विज्ञान रथ को अनुसंधान एवं विकास, खनन, खनिज, धातु और सामग्री (4एम) पर केंद्रित किया गया है, जिससे संबंधित वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम भी इस पहल में शामिल रही।

विज्ञान रथ ने जमशेदपुर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों – सेंट पीटर्स इंग्लिश स्कूल, पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय, टाटानगर, जमशेदपुर महिला कॉलेज और को-ऑपरेटिव कॉलेज का दौरा किया। छात्रों ने वैज्ञानिकों से संवाद किया और रथ में प्रदर्शित वैज्ञानिक नवाचारों को करीब से देखा। विद्यार्थियों ने इस पहल को अत्यधिक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।

‘विज्ञान रथ’ भारत सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टिकोण के अनुरूप विज्ञान और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है।

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पूर्वी सिंहभूम

जमशेदजी टाटा की 186वीं जयंती: एक सपने से बनी भारत की पहली व्यवस्थित नगरी

जमशेदपुर, भारत का पहला नियोजित औद्योगिक शहर, जमशेदजी टाटा की दूरदर्शिता का प्रतीक है। 1919 में नामकरण हुआ, यह टाटा स्टील समेत कई उद्योगों का केंद्र है। सुव्यवस्थित बुनियादी ढांचे, स्वच्छता और रोजगार के अवसरों ने इसे स्मार्ट सिटी जैसा बनाया, जो औद्योगिक विकास और शहरी नियोजन का बेहतरीन उदाहरण है।

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जमशेदपुर: झारखंड की औद्योगिक राजधानी जमशेदपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक विज़न की कहानी है। यह कहानी है एक ऐसे सपने की, जिसे जमशेदजी टाटा ने देखा और उनकी दूरदर्शिता ने इसे हकीकत में बदल दिया। झारखंड भले ही वर्ष 2000 में राज्य बना हो, लेकिन टाटा समूह की भूमिका यहां के विकास में पिछले सौ वर्षों से भी अधिक पुरानी है। जमशेदजी टाटा की 186वीं जयंती के अवसर पर हम जानते हैं कि कैसे उनका सपना एक आधुनिक औद्योगिक नगरी में तब्दील हुआ।

साकची से जमशेदपुर: एक ऐतिहासिक बदलाव

टाटा स्टील (जिसे पहले टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी या टिस्को कहा जाता था) की स्थापना 1908 में हुई थी। 1912 में यहां पहली बार स्टील इंगट का उत्पादन हुआ। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, कंपनी ने ब्रिटिश सेना को 1500 मील लंबी स्टील की पटरियां देकर बड़ी मदद की। इसी योगदान के सम्मान में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने 1919 में इस शहर का नाम जमशेदजी टाटा के सम्मान में जमशेदपुर रखा और कालीमाटी रेलवे स्टेशन को टाटानगर के नाम से नवाजा।

भारत के पहले व्यवस्थित शहरों में शामिल

जमशेदपुर को शुरू से ही एक सुव्यवस्थित औद्योगिक शहर के रूप में विकसित किया गया। यहां चौड़ी सड़कें, हरियाली से भरपूर पेड़, कर्मचारियों के लिए सुव्यवस्थित कॉलोनियां, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच), तकनीकी शिक्षा के लिए शावक नानावटी टेक्निकल इंस्टीट्यूट (एसएनटीआई), और खरीदारी के लिए बिष्टुपुर बाजार बनाया गया। शहर में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था के लिए डिमना डैम का निर्माण किया गया। आज जमशेदपुर अपने बेहतरीन बुनियादी ढांचे के कारण देश के सबसे स्वच्छ और सुव्यवस्थित शहरों में गिना जाता है।

टाटानगर: औद्योगिक क्रांति का केंद्र

जब टाटा स्टील की स्थापना हुई, तब यहां से करीब पांच किलोमीटर दूर कालीमाटी रेलवे स्टेशन स्थित था, जो हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग का हिस्सा था। 1907 में इसे औद्योगिक जरूरतों के अनुसार विकसित किया गया और बाद में इसका नाम टाटानगर रेलवे स्टेशन कर दिया गया। आज यह देश के सबसे व्यस्त और अधिक राजस्व देने वाले रेलवे स्टेशनों में शामिल है, जहां से रोजाना 50,000 से अधिक यात्री यात्रा करते हैं।

जुबिली पार्क: नेहरू ने लगाया था बरगद का पौधा

1954 में जमशेदपुर के हरे-भरे जुबिली पार्क का उद्घाटन भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। उन्होंने यहां एक बरगद का पौधा लगाया था, जो आज एक विशाल वृक्ष बन चुका है। जुबिली पार्क आज भी शहर का सबसे सुंदर पर्यटक स्थल बना हुआ है और लोगों को सुकून भरा वातावरण प्रदान करता है।

औद्योगिक नगरी, रोजगार और विकास

जमशेदपुर में टाटा स्टील के अलावा कई अन्य औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं, जिनमें टाटा मोटर्स, टाटा कमिंस, टाटा ब्लूस्कोप, इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट्स (आईएसडब्ल्यूपी), जेम्को जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों ने लाखों लोगों को रोजगार देकर न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि जमशेदपुर को एक औद्योगिक शक्ति के रूप में स्थापित किया।

जमशेदपुर का गौरवशाली इतिहास: प्रमुख पड़ाव

  • 1908: टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) की स्थापना
  • 1911: कालीमाटी रेलवे स्टेशन (अब टाटानगर) बना
  • 1915: शहर का पहला हाईस्कूल – मिसेज केएमपीएम इंटर कॉलेज खुला
  • 1919: वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने जमशेदपुर का नामकरण किया
  • 1930: बिष्टुपुर बाजार की स्थापना
  • 1939: कीनन स्टेडियम का निर्माण
  • 1942: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान टाटा स्टील ने टैंक बनाए
  • 1949: उच्च शिक्षा के लिए को-ऑपरेटिव कॉलेज की स्थापना
  • 1952: महिला कॉलेज की शुरुआत
  • 1953: ट्यूब कंपनी की स्थापना
  • 1958: पंडित जवाहरलाल नेहरू ने जुबिली पार्क का उद्घाटन
  • 1968: टीआरएफ कंपनी की स्थापना

भविष्य का जमशेदपुर: स्मार्ट सिटी बनने की राह पर

117 वर्षों की यात्रा पूरी करने के बाद भी जमशेदपुर निरंतर विकास की ओर बढ़ रहा है। साफ-सुथरी सड़कें, स्वच्छ जल आपूर्ति और 24 घंटे बिजली जैसी सुविधाएं इसे भारत की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को टक्कर देने के लिए तैयार कर रही हैं।

जमशेदजी टाटा का सपना केवल एक उद्योग लगाने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह भारत में एक ऐसे शहर की कल्पना कर रहे थे, जो आत्मनिर्भर हो, जहां हर नागरिक को समान अवसर मिले, और जो विकास का प्रतीक बने। आज जमशेदपुर, उनके उसी सपने को साकार करता हुआ भारत के सबसे बेहतरीन और सुव्यवस्थित शहरों में से एक बन चुका है।

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पूर्वी सिंहभूम

Exodus of Men: When a Village Was Left with Only Women, a Daughter Became the Son

When the only man in Jharkhand’s Ramchandrapur Sabar Basti died, his 14-year-old daughter performed his last rites. With most men forced to migrate for work, the village was left with only women and children. This heartbreaking reality raises a question—how long will Jharkhand’s villages endure this silent crisis?

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Jamshedpur: The harsh truth of migration was on full display in Ramchandrapur Sabar Basti, a village in Ghatsila, East Singhbhum district of Jharkhand. When the only remaining man in the village, 45-year-old Jua Sabar, passed away, there were no men left to perform his last rites. The women of the village took charge, carrying out every ritual from preparing the funeral pyre to digging the grave.

The Last Man Was Gone

This village of about 80 people has seen most of its men leave in search of work. Jua Sabar was the only man who had stayed behind, but his sudden illness and death left the village without a single male member. In his absence, the women stepped up to do what had to be done.

A 14-Year-Old Daughter Became the Son

Jua Sabar’s son, Shyamal Sabar, works in Tamil Nadu and could not return in time. His first wife had already passed away, and his second wife, Gulapi Sabar, was left alone in grief. But in this moment of loss, their 14-year-old daughter, Sonia Sabar, did something extraordinary—she took on the role of a son.

Sonia, who had to drop out of school after the eighth grade due to family struggles, carried her father’s body, dug the grave, and performed his last rites herself.

A Village of Women and Children

Ramchandrapur Sabar Basti has 28 families and 85 people. Over 20 young and middle-aged men have migrated to states like Tamil Nadu and Kerala for work. The only ones left behind are women, children, and the elderly.

Forced to Leave, Forced to Struggle

The Sabar tribe, already on the verge of extinction, faces a deepening crisis. With no jobs in their homeland, men are forced to migrate, leaving their families behind. Now, even in death, their loved ones must fend for themselves.

Jua Sabar’s death has exposed a painful truth—Jharkhand’s villages are being emptied of men, leaving women to bear every burden alone. How much longer will these villages suffer in silence?

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पूर्वी सिंहभूम

Revenge for Father’s Murder After 11 Years: ‘Brett Lee’ and ‘Takla’ Chased and Executed Victim

Eleven years after his father’s murder, Rohit Dixit avenged it by executing Santosh Singh near his home in Jamshedpur. Chased down and shot dead, Santosh couldn’t escape his fate. Police arrested five accused, including ‘Brett Lee’ and ‘Takla,’ uncovering a well-planned revenge plot with potential political links.

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Jamshedpur: Eleven years after his father’s murder, Rohit Dixit avenged the killing by orchestrating the brutal execution of 35-year-old Santosh Singh near his home on Mango Gurdwara Road. A seven-member gang, including Ankit alias Brett Lee and Vimal Gop alias Takla, ambushed Santosh on January 19. As he tried to escape, running into a nearby house, the assailants relentlessly pursued and shot him dead on the spot.

Following an intensive investigation, Jamshedpur police have arrested five of the seven accused. Senior Superintendent of Police (SSP) Kishore Kaushal, in a press conference, confirmed the arrests and revealed that weapons and ammunition had been seized. A special police team, led by Deputy Superintendent of Police (Headquarters-1) Bhola Prasad Singh under the supervision of SP (City) Kumar Shivashish, tracked down three key suspects—Rohit Dixit, Shubham Kumar, and Vimal Gop alias Takla—on National Highway-33, recovering the scooter and weapons used in the crime.

Further, Vivek Kumar Tiwari alias Lakhi Tiwari and Ankit Sharma alias Brett Lee were apprehended from the Mango area for their role in planning and conducting reconnaissance before the murder. The police revealed that the killing was a revenge attack for the 2014 murder of Rohit’s father, Pashupati Nath Dixit, for which Santosh Singh had been convicted and served jail time.

Adding a political twist to the case, one of the accused, Jitendra Singh, had recently contested the parliamentary elections as an independent candidate but was unsuccessful. As investigations continue, police anticipate further revelations in this high-profile murder case.

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कोल्हान

Tiger Returns to Dalma: Paw Prints Discovered, Panic Grips Villages

A tiger has returned to Dalma Wildlife Sanctuary, sparking panic in nearby villages after paw prints were found, with wildlife officials working to track its movements.

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A tiger, which had previously roamed across various regions, has returned to the Dalma Wildlife Sanctuary in Jamshedpur, sparking fear among local villagers. The big cat, originally from the Palamu Tiger Reserve, was spotted in the nearby areas of Kookadhu and Opo villages in Patmada’s Gobarghushi Panchayat, where several paw prints were found. Wildlife officials who reached the scene confirmed that the prints belong to the tiger.

In addition to the paw marks, several villagers have reported hearing the tiger’s roar, further escalating the sense of panic. The first to spot the tracks were local residents Vrikodhar Sabar and Ajit Singh, who promptly alerted the community. The forest department has issued a warning to the villagers to remain vigilant.

Despite the alarming signs, no reports have emerged of the tiger attacking livestock or other animals. The forest department has placed tracking cameras in several locations across the area to monitor the animal’s movements. Currently, the tiger’s location has been traced back to Dalma, where efforts to track it continue.

This is the same tiger that was recently seen moving through the forests near Chakandil’s Tulgram-Khunti region before crossing into West Bengal’s Belpahadi area. After making its way through Purulia, the tiger has now returned to Dalma.

Authorities are working tirelessly to trace the animal’s exact movements and ensure the safety of local residents while also focusing on the well-being of the tiger.

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पूर्वी सिंहभूम

LPG Cylinder Prices in Jharkhand: Jamshedpur Offers the Cheapest Deal at ₹842.50, Hazaribagh and Koderma Reach ₹862

On 29th January 2025, Jamshedpur offers the cheapest 14.2 kg LPG cylinder at ₹842.50, while Hazaribagh and Koderma charge ₹862. Subsidy of ₹37.25 available.

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On 29th January 2025, the cost of a 14.2 kg LPG cylinder varies across Jharkhand, with the cheapest being in Jamshedpur at ₹842.50. Other districts such as Hazaribagh and Koderma have the highest prices, with cylinders priced at ₹862. Below is a list of LPG prices across different cities in Jharkhand:

DistrictLPG Cylinder Price
Bokaro₹860.50
Chatra₹859.50
Deoghar₹860.50
Dhanbad₹860.50
Dumka₹860.50
East Singhbhum (Jamshedpur)₹842.50
Garhwa₹860.50
Giridih₹860.50
Godda₹860.50
Gumla₹860.50
Hazaribagh₹862.00
Jamtara₹860.50
Khunti₹860.50
Koderma₹862.00
Latehar₹860.50
Lohardaga₹860.50
Pakur₹860.50
Palamu₹860.50
Ramgarh₹862.00
Ranchi₹860.50
Sahibganj₹860.50
Seraikela-Kharsawan₹843.00
Simdega₹860.50
West Singhbhum (Chaibasa)₹852.00

Source: : Indian Oil

Why Are Prices Different?

LPG prices are determined by government oil companies and vary across districts due to local taxes and logistical factors. Prices are also influenced by global crude oil prices.

Cheapest and Most Expensive LPG Cylinder Prices in Jharkhand

  • Cheapest: Jamshedpur – ₹842.50
  • Most Expensive: Hazaribagh and Koderma – ₹862.00

LPG Subsidy

The government provides a subsidy for LPG cylinders. If you book a 14.2 kg cylinder, ₹37.25 is credited to your bank account after delivery as a subsidy.

LPG Usage

LPG is widely used in homes and industries. It is a safe and colorless gas, and the government has provided free LPG connections under the Ujjwala scheme to millions of poor families in Jharkhand.

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